“चल देखते हैं,
मेरे दिल के टुकड़े करके.....
तू कितना खुश रह पाएगा।
कभी तो तीस उठेगी तेरे दिल में,
कभी तो मेरा ख्याल आएगा।
तू लाख दलीलें दे दे मुझको,
पर खुद को क्या समझाएगा।।
एक हिस्सा तो मेरा भी है,
तेरी इन यादों पर.....
आज कर दिया है,
अलग खुद को मुझसे...
पर क्या गुजरा वक्त बदल पाएगा।
चल देखते हैं,
मेरे दिल के टुकड़े करके...
तू कितना खुश रह पाएगा।।” © जतिन त्यागी