तेरी गली में आया
मिलने के लिये नहीं
बस,एक सुवास लेने के लिए।
कदमों पर विश्वास नहीं
पर चलता गया
तुमसे मिलने नहीं
प्यार की दूरी तय करने।
मन माना नहीं
तुम्हारे लिये नहीं
तुम्हारी रूह के लिये।
खींचता गया हर क्षण
शब्दों के जमाव पर नहीं
खालीपन के भराव पर।
*महेश रौतेला
०१.०७.२०१५