माना वो धनवान बहुत है
पर उसको अभिमान बहुत है
गया बुलन्दी पर है जब से
रिश्तों से अनजान बहुत है
अश्क़ छुपाये है आँखों में
होठों पर मुस्कान बहुत है
साथ नही जाएगा कुछ भी
दो गज़ का श्मशान बहुत है
कोई नही उसका है सानी
कहता है पहचान बहुत है
मुर्दों पर से खाल काढ़ता
क्या बोलें हैवान बहुत है
देने को मुख मोड़ चले वो
पाने का अरमान बहुत है
अगले पल का नहीं भरोसा
लेकिन झूठी शान बहुत है
"नवल "सुखों की खातिर जग में
अपना तो ईमान बहुत है