मैं पहाड़ चढ़ते-चढ़ते
स्वतंत्र हो रहा था,
मेरे अन्दर अनेक पहाड़ बन रहे थे
वृक्ष उग, जंगल बना रहे थे।
सोच रहा था
उसमें शेर या चीता आ जाय तो
बच्चे डर जायेंगे,
बच्चों को डराना भी
रोमांचित करता है।
घास के मैदानों में
हिरनों को देख बच्चे खुश हैं,
वे जानते हैं
हिरन सीधा साधा जानवर है
दहाड़ेगा नहीं शेर की तरह।
* महेश रौतेला