ज़िंदगी कभी जन्नत सी लगी तू मुझे
तो कभी जैसे घिरी तूफानों के बिच
देखे तेरे ऐसे भी है चेहरे
बाय गॉड डरसी गई हूं
बड़ी ज़ालिमसी हैं तू
ना ठीकसे रोने देती हो और ना ठिकसे हसने!
ना जाने अब क्या चाहती हो तुम मुझसे
अब मान भी जा कब तक यूं सताएगी
हम कोनसे रुकने आए हैं तेरे पास हमेशा के लिए
एक उम्र के बाद तुझे छोड़े के चले ही जायेंगे।