रामायण भाग - 14
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गिद्धराज से भेट (दोहा - छंद)
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गिद्धराज वन में मिले , कहीं राम ने बात।
सीता बिन बीते नहीं , मेरे दिन औ रात।।
गिद्धराज ने तब कहा , जोड़े दोनों हाथ।
रावन माँ को ले गया, लंका अपने साथ।।
रक्षा नहीं मैं कर सका , हैं मुझको ये खेद।
पंख काट के कर दिया, अंग अंग में छेद।।
घायल पंछी सो गया , मिली राम की गोद।
चरण शरण प्रभु की मिली,मन को मिला प्रमोद।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित