रामायण भाग - 13
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सीता - वियोग (दोहा - छंद)
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सूनी कुटिया देख कर, चीखें प्रभु श्री राम।
बिन सीता के कुछ नहीं, बिगड़े सारे काम।।
सीते सीते चीख कर, प्रभु कर रहे विलाप।
मिले जानकी अब कहाँ, करते प्रभु संताप।।
श्यामा हिरणी तू बता, बात जरा ये मान।
कहाँ है जनक नंदनी, वन हैं ये अंजान।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित