रामायण भाग - 12
****************
सीता हरण (दोहा - छंद)
*********************
कनक हिरण को पकडने, निकल पड़े श्री राम।
एक बाण से ही किया , उसका काम तमाम।।
लगा बाण जब राम का, मुख से निकला राम।
सुना रुदन जब मात ने , भूली सारा काम।।
कहे लखन से जानकी, सुनो ये आवाज।
विपदा कोई आ पडी ,लगता प्रभु को आज।।
मात सिया की हो रक्षा, काम किया फिर एक।
लक्ष्मण रेखा खींच दी , शत्रु है यहां अनेक।।
चाहे कुछ भी हो मगर, रेखा ना हो पार।
आए कोई भी अगर, करे इस पर विचार।।
लखन गमन के बाद ही, रावन चलता चाल।
साधु वेश में आ गया, बदला अपना हाल।।
भिक्षा साधु को दीजिए, करे धर्म का काम।
रक्षा करे सब की सदा, रघुवर प्रभु श्री राम।।
सुनी संत की ये बात, सीमा कर दी पार।
हाथ पकड़ कर ले गया, दुष्ट वो दुराचार ।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित