*ऑनलाइन दोस्ती*
बहुत आसान है
कह देना
कि ऑनलाइन वाली दोस्ती
बस टाइमपास होती है
पर क्यों...???
सच में होता है किसी के पास
इतना टाइम जो वो यूँ ही बर्बाद करे.
सच तो यह है कि
इस फेसबुक/इंस्टा/व्हाट्सएप की दुनिया में...
मिल जाता है कोई ऐसा...
जिसे आपकी परवाह हो
जिसे फर्क पड़ता हो
आपके खुश होने या
आँसू बहाने से...
जहाँ सिर्फ शब्दों से
महसूस कर लिया जाता है
एक दूसरे की आत्मा को...
जहाँ किसी के साथ
दिल खोल कर
हंसने का मन कर जाये...
कभी मन भारी हो तो बस
कुछ शब्दों से...
उसके काँधे पर
सर रख के रो लिया जाये...
और उन्हीं शब्दों में लिपटा
प्यारा सा एहसास दिलाये आपको
कि आप अकेले नहीं हो...
कोई है आपके साथ
जो आपके मुस्कुराने की
वजह बनना चाहता है...
कोई है
जो कुछ इमोजी के ज़रिये
आपको हसाना चाहता है
कोई है
जिसे सोचकर
आप मुस्कुरा सकते हो बेवजह...
कोई है
जिसके कुछ शब्द
आपकी आँखों में
मुस्कुराहट ले आते हैं ...
कभी उसकी अनदेखी
दुखा देती है दिल को....
सिर्फ शब्दों से ही
मना भी लिया जाता है...
सिर्फ
शब्दों का ही तो खेल है
न कभी देख सके
एक दूसरे को
न छू पाने की चाह....
ना किसी के शरीर की लालसा...
बस भावनाओं की डोर
जो बांध ली जाती है
बिन कहे
बिन सुने
Dipika Patel