रामायण भाग - 8
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भरतजी का अयोध्या आगमन (दोहा - छंद)
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भरत अवध में आ गये, जानी जब ये बात।
कैकयी से वचन कहे, किया पुत्र से घात।।
बिना राम के अवध में, काली है हर रात।
रात दिवस सब एक सा,भाये कुछ ना बात।।
प्राण पिता के ले गए, तेरे दो वरदान।
मात शब्द का कर दिया, तूने तो अपमान।।
कठोर बोले भरत के, लगते जैसे शूल ।
पश्चाताप ह्रदय में हुआ, भारी होगी भूल।।
वन से लाने राम को, चली कैकयी साथ।
शत्रुध्न संग चल पड़े, थाम भरत का हाथ।।
सब माताएं साथ में, गुरुवर भी है संग।
अवधपुरी सब हो गई , भक्ति रस में मलंग।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित