न पूछिए हाल मेरी जिंदगी का इस ज़माने से
ज़माने का क्या है वह तो अपनी सुनाएगा
मेरा हाल तो वैसे ही बेहाल है
गम का आशियाना लिए फिर रही हूं
और होठों पर अजीब सी हंसी छा रही है
पूछ मेरे दिल से है क्या गुजरी होगी तेरे जाने के बाद ... बिंदु
इस ज़माने ने क्या क्या सितम गुजारे हैं
मेरा हाल उस ज़माने से नहीं मेरे दिल से पुछो
मेरी आंखो के आंसू की बजाए
मेरे होठों की हंसी चुभती है इन लोगों को
क्यों न मैं मुस्कुराऊ ,, मेरी मुस्कुराहट भी कई को ना पसंद है
मैं इस ज़माने के लिए नहीं बनी हूं क्योंकि मेरा खुद का वजूद है
मेरी दुनिया मेरे लिए मेरे बच्चे मेरा परिवार मेरे प्यारे स्नेहीजनों और मेरे प्यारे शिष्यों के लिए है।
बस,, मुझे इस ज़माने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मेरी दुनिया छोटी है लेकिन बहुत प्यारी है ।
जय द्वारकाधीश 🙏🏻
04:05 AM 05/05/22