रास्ते हमें लाते हैं
ले जाते हैं
और स्नेह के लिए इधर उधर छोड़ देते हैं,
ये बदलाव हैं,
सारांश हैं , पथ हैं परिवर्तन के।
राहें हमारी जड़ों को
खींच कर ले जाते
असीम गहराईयों तक,
और मोह से परे
कृष्ण की लीलाओं सी बनी रहती हैं।
ये खेल भी हैं,खिलाड़ी भी हैं
गंतव्य की एक धारणा हैं,
सौन्दर्य से पूर्ण
एक लक्ष्य भी रखे हैं।
रास्ते बनते हैं
बिगड़ते हैं,
पाँव तले दबते भी हैं।
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महेश रौतेला
२०१५