प्रभाती - दोहा
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फूल खिले हैं बाग में, भौंरे है मद होश ।
सूर्य किरण की लालिमा, भरदे मन में जोश।।
ठंडी ठंडी ये हवा , करती है मद होश।
बस्ती सारी शांत हैं, गालियां भी खामोश।।
सुबह जल्दी उठकर सदा, प्रभु को करना याद।
बाकी सारे काम तुम , करना इसके बाद।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित