मुझे अपने कर्म और कर्मो का बेहतर परिणाम ,
भोगने के लिए नही चाहिए , केवल इतनी संतुष्टि की मैने,
बेहतर किया |
तुम्हारी ही इच्छा मान चल पड़ी हूँ एक राह , मन ,वचन, कर्म मे मजबूत संकल्प भर दो | बैठे हो भीतर ही शक्ति के पुंज बुद्धि का घड़ा भर दो जिससे सतकर्मो को संतुष्ट कर सकूँ |