“यहां मजबूत से मजबूत लोहा टूट जाता है।
कहीं झूठे इकट्ठे हो तो सच्चा टूट जाता है।।
ना इतना शोर कर जालिम हमारे टूट जाने का।
गर्दिश में फलक से भी सितारे टूट जाते है।।
और तसल्ली देने वाले तो तसल्ली देते रहते हैं।
मगर वह क्या करें जिसका भरोसा टूट जाएगा।।
किसी से इश्क करते हो तो खामोश रहिएगा।
क्योंकि जरा ठेस से ये शीशा टूट जाता है।।
यहां मजबूत से मजबूत लोहा टूट जाता है।
कहीं झूठे इकट्ठे हो तो सच्चा टूट जाता है।।”