“तुम ने पकड़ा हाथ किसी और का,
और तुम चल पड़ी।
दुनिया तुम्हें हसीन लगी,
तुम निकल पड़ी।।
धोखा तुमने दिया है, तो तुम्हें मिलेगा।
जैसा बीज बोओगे वैसा ही मिलेगा।।
और दरिया की रिवायत है, चलती रहती है।
इस जवानी का क्या है ढलती रहती है।।
आज मुझे हराकर, तुम जीत जाओगी।
लेकिन मेरा दावा है, बुढ़ापे तक मेरे ही गीत गाओगी।।”