“अगर मैं रूठ गया था, तो तुम मुझे मनाना आते।
काश मेरे गुस्से पर, तुम मुझे समझाने आते।।
और पलट कर मांग लेता, मैं माफी तुमसे।
मेरी जान, अगर तुम मुझ पर हक जताने आते।।
भले ही सच झूठ में, उलझी है दुनिया यहां।
मैं मान लेता हर वह बात, जब तुम मुझे बताने आते।।
मेरे गुस्से के वक्त, तुम मुझे समझाने आते।” © जतिन त्यागी