हवा का एक झोंका
जाने कहाँ चला गया तू, बनके हवा का एक झोंका
न मेरी आवाज़ सुनी, क्यों किसीने तुझे ज़रा भी नहीं रोका !
एक आंधी आइ, उड़ा कर ले गयी तुझे, लूट गया मेरा बहुत कुछ
एक पल भर में ही, मेरा जीवन बदल गया सचमुच !
लूटके वो ले गयी साथ तुझे, बिखर गया हमारा संसार
जीवन नैया डूब गई मझधार में ही, पहुँच पायी न उस पार
Armin Dutia Motashaw