कविता कहाँ नहीं ??
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कविता मधुबन है या क्रंदन
कविता अर्चन है या वंदन
कविता फूलों की क्यारी है
मन-आँगन की फुलवारी है --
ये छंदों में भी ,छंद रहित
है ख़ुद के लिए या है परहित ?
कविता हलचल भी है मन की
यह उथल-पुथल है जीवन की--
कविता आँसु की लड़ियाँ भी
कविता जीवन की कड़ियाँ भी
कविता आशा की डोली है
कविता है महल और खोली भी --
दीपों की लड़ी ,रंगोली भी
ये खेले आँख मिचौली भी
कविता है शोर तमाशा भी
ये जीवन की अभिलाषा भी --
ये सोन चिरैया भी कविता
ये ता-ता थैया ,है सरिता
कविता सिंदूर है ,रोली भी
ये आँसू भरी ठिठोली भी--
कविता रोना और गाना है
ह्रदय में भरा ख़ज़ाना है
कविता ग़रीब की है पीड़ा
ये शहज़ादों की है क्रीड़ा --
कविता न बंधे सीमाओं में
रोती हँसती क्रीड़ाओं में
ये भूख भी है ये रोटी भी
शाहों का सज्ज,लंगोटी भी--
कविता चिंदी-चिंदी मन है
ये हर जीवन का दर्पण है
ये श्वाँस श्वाँस में बसती है
रोती,हँसती है,डसती है --
हर पल का ये ही गाना है
ये ह्रदय का विपुल ख़ज़ाना है
दिल की धड़कन है ,गाना भी
प्रेमी की आह ! तराना भी --
शाश्वत है, गति जीवन की है
ये बिछुड़न और मिलन भी है
ये चिंदी-चिंदी कतरा है
जो सदा जुड़ा ही रहता है --
कविता ,मत पूछो कहाँ-कहाँ
जब तक साँसें हैं ,यहाँ वहाँ
कविता बिन कोई पल ही नहीं
जीवन भी नहीं ,धड़कन भी नहीं !!
डॉ.प्रणव भारती