जो काशी के पालन हारे है
जो गंगा सिर पर धारे है।
सारी सृष्टि उद्धारे है
वो भोलेनाथ हमारे है।।
जो भस्म रमाने वाले है
सापो की माला धारे है।
जो सृष्टि के संहारक है
वो महाकाल हमारे है।।
जो दीनो के तारणहारे है
जो भाॅग -धतूरा खाते है।
मस्ती मे मगन हो जाते है
वो शंकर देव हमारे है।।
जो शशि भाल धारण करते है
जो बिष का पारण करते है।
जो मोक्ष मार्ग दिखलाते है
वो मृत्युंजय कहलाते है।।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाये।
बाबा पशुपतिनाथ से प्रार्थना करते हुए की आप मेरी कलम को आशीष प्रदान करें।
मीरा सिंह