#WomensDay
मैं और मेरे अह्सास
आरजुओं की तबाही का मंज़र देखो l
छुपा हुआ है बारूदी गोला अंदर देखो ll
रूह का सीना ख़त्म करने के लिए आज l
अपने ही साथ लिए फिरते हैं खंजर देखो ll
आँधी तूफ़ान आते जाते रहते हैं उम्रभर l
सामना झिलने को तैयार है निरंतर देखो ll
खूबसूरती देखने का नज़रिया सिखों l
तन नहीं नारी का मन है सुन्दर देखो ll
सब को ख़ुद के जैसा सीधा न समज l
ज़मीं से आसमान का अंतर देखो ll
26-2-2022
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह