मैं अक्सर यह सोचता हूँ कि मैं बहुत 'अलग' हूँ और शायद इसीलिए क्योंकि मुझे अकेलापन पसन्द है.. मेरी कोई चाह नही है कि मेरा कोई मित्र भी रहे, मैं अकेले ही खुश और शांत रहता हूँ.. मैं अपने सारे दुःख और सुखः की बातें खुद से ही करता हूँ.. मैं चाहता हूँ कोई भी मेरे बारे में कुछ भी न पूछे।