कर्म ही पूजा
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ईश्वर के साथ खुद पर हो विश्वास
न हो हताश निराश,
कर्म की पूजा का आत्मविश्वास।
ईश्वर भी उसी का देगा साथ
जिसके मन में कर्म का
पूजा जितना होगा विश्वास।
क्योंकि कर्म पूजा ही नहीं
धरा पर सबसे बड़ी पूजा है,
कर्म से बड़ा न धर्म कोई दूजा है।
हम लाख तर्क वितर्क कर लें
पर सब कुतर्क है
दुनिया में कर्म से बड़ा
न कोई धर्म, न कोई पूजा है।
इसलिए कहता हूँ
कर्म ही धर्म है
कर्म ही पूजा है
कर्म ही सत्य है
कर्म के बिना सब व्यर्थ है।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित