वैसे तो देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है,
परन्तु किसी ने यह ना सोचा की,
आज भी हम जंजीरों में जकड़े है।
यह बेड़ियां है - पिछड़ी सोच, जातिवाद, निरक्षरता, गरीबी और बेरोज़गारी।
जो हमें पीछे खींच रहीं है,
अवरोध उत्पन्न कर रही है हमारी तरक्की में,
तो चलो,
फिर एक बार वक्त हो चला है,
एकजूट होने का, हुंकार भरने का,
अपने पूर्ण सामर्थ्य के साथ, बेड़ियां को तोड़ने का,
और
आज़ादी को फिर एक बार, अपने नाम करने का।
#Azadi