Last song by mohd. rafi and naushad as a composer .
मोहम्मद रफी ने खुद कहा था , ये गीत इतना प्यारा हे कि इसके बाद मे शायद मर भी जाऊ तो भी मुझे कुछ गम नही होगा ।
जिस रात के ख्वाब आये
वो ख़्वाबों की रात आयी
जिस रात के ख्वाब आये
वो ख़्वाबों की रात आयी
शर्मा के झुकि नज़रें
होंठों पे वो बात आयी
जिस रात के ख्वाब आये
वो ख़्वाबों की रात आयी
पैग़ाम बहारों का
आखिर मेरे नाम आया
फूलों ने दुआएं दी
तारों का सलाम आया
तारों का सलाम आया
आप आये तो महफ़िल में
आप आये तो महफ़िल में
नग़मों की बरात आयी
जिस रात के ख्वाब आये
वो ख़्वाबों की रात आयी
यह महकी हुई जुल्फें
यह बेहकी हुयी साँसें
नींदों को चुरा लेंगी
यह नींद भरी आँखें
यह नींद भरी आँखें
तक़दीर मेरी जागी
तक़दीर मेरी जागी
जन्नत मेरे हाथ आयी
जिस रात के ख्वाब आये
वो ख़्वाबों की रात आयी
चेहरे पे तबस्सुम ने
एक नूर सा छलकाया
क्या काम चिरागों का
जब चांद निकल आया
जब चांद निकल आया
लो आज दुल्हन बन के
लो आज दुल्हन बन के
पहलु में हयात आयी
जिस रात के ख्वाब आये
वो ख़्वाबों की रात आयी
शर्मा के झुकीं नज़रें
होंठों पे वह बात आयी
जिस रात के ख्वाब आये
वो ख़्वाबों की रात आयी.
Movie/album: हब्बा खातून
Singers: मुहम्मद रफ़ी
Song Lyricists: अली सरदार जाफरी
Music Composer: नौशाद अली
Music Director: नौशाद अली