[12/8, Dr. Damyanti Bhatt: ]
विषय- "विवाह",
विवाह कोई गुडो- गुड़िया का खेल नहीं होता था,
हमारी संस्कृति में,
वैदिक संस्कृति में यारों,
विवाह एक पवित्र बंधन है।
विवाह एक पवित्र संस्कार है।
जो एक बार ग्रहण किया,
सो आजीवन निभाया जाता था,
अलबत, निभाना पड़ेगा ऐसा तो
सवाल ही उपस्थितनहीं होता था
विवाह एक पवित्र बंधन है।
विवाह एक पवित्र संस्कार है।
विवाह से वधू श्वसुरगृहे ऐसे
घुल-मिल जाती वैसै मानो
दूध में मिश्री ,
जो कभी नहीं जूदा होती,
जैसे दूध में मिला हुआ मक्खन,
वैदिक संस्कृति में यारों,
विवाह एक पवित्र बंधन है।
जैसे फूलों से खुश्बू कभी
जुदा हो सकती हैं ?
जैसे सागर में मिली हुईं नदी,
जैसे पेड़ से लिपटी हुई लता,
वैदिक संस्कृति में यारों,
विवाह एक पवित्र बंधन है।
नारी का स्थान देवी सा
नारी गौरव गार्गी,मैत्रेयी,
नारी ज्ञान की भी गंगोत्री,
संतान की भी प्रदात्री,
वैदिक संस्कृति में यारों,
विवाह एक पवित्र बंधन है।
नारी से घर-परिवार
खुशहाली, आती,
नारी गृह लक्ष्मी,
नारी चिरंतन सुख की
दाता, माता,जाया,
नारी बिना सुख निराधार हो जाता
वैदिक संस्कृति में यारों,
विवाह एक पवित्र बंधन है।
स्वरचित - दमयंती भट्ट
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