लो फिर ले आया मन उस जगह, वो ही यादों के गलियारों में जहां दिल ने कहा थोड़ा रुक जा।
एक ऐसा घरोदा बनाया था, जहां खुशिया ही खुशियां थी,
हर एक लम्हा प्यार से संजोया था,
हां कुछ अनकहे जज़्बात थे और कुछ अनसुलझे सवाल भी थे, पर फिर भी थे ढेर सारी खुशियां।
अब जब देखते हे तो लगता हे के वहां साथ वाली दूरियां थी और अभी दूर वाली नजदीकियां।
एक दूसरे की खुशियों के लिए दूर हुए हम, ये कहां ले आया साथ अपना,
देखो क्या अब भी दिख रहा हे वो हमारा घरौंदा?