गर रुकते है तेरे अश्क मेरे आ जाने से
तोड़ कर आ जाऊँ हर बंधन ज़माने से
ग़र मिलती है तूझे बरकत तो खुशी होगी
मैं मुकरुगां नहीं तुझसे दूर जाने से..
तेरी ख़ुशी के लिए इतना भी दाग ले लेंगे
छोड़ जाऊंगा तेरा दयार किसी बहाने से
ग़र पता होता अंजाम मेरी मुहब्बत का
ना बहकते मेरे कदम तेरे बहकाने से
और हैं जो वादा खिलाफी करते होंगे निराला
जान निसार कर दूँगा मैं वफ़ा को निभाने से