शिर्षक: बैचेनी
उन्हें क्या गम है जो मुझे याद करेंगे
उनका अपना जहाँ है, वक्त क्यो बर्बाद करेंगे ?
रोशनी कहने भर को है, तो क्या गम है ?
गुनाह सिर्फ मेरा है, ये तो एक इल्जाम है
दर्द का भी दस्तूर होता होगा, जो निभाता होगा
साथ मेरा अच्छा लगता, तभी साथ चलता होगा
रस्मों की दुनिया में हर बंधन अधूरा होता है
धागा में बंधा फूल, कब तक खिला रहता है ?
क्यों सोचता यह, राहें मेरी ही सबसे जुदा है
सबकी अपनी मंजिल, सब का अपना खुदा है
प्यार आजकल बहारों में ही मशगूल रहता है
बताओं तो, वीरानों में कौन सा फूल खिलता है
शिकायत अब नहीं करना, इससे दिल जलता है
अंतिम राह पर चलना, अब जरा मुश्किल लगता है
✍️ कमल भंसाली