*हसरतें तमाम किए जाते हैं*
बातें बड़ी बड़ी करके.. लोग चले जाते हैं
वक़्त बदलते अपना चेहरा बदल जाते हैं
उसके चेहरे पर ना पड़े... शिकन की बूंदे
हम तो बस उसका लिहाज किए जाते हैं
अरमान भर आधी नजर देखते हैं उसको
और वो हैं कि हमें मगरूर बताये जाते हैं
उसको देख हसरतें फिर जवान हो जाती हैं
हमारी हसरतों को वो तमाम किए जाते हैं
किस किस का भ्रम... हम दूर करें निराला
अब ये आलम है कि खुद पिसते चले जाते हैं
Sanjay Ni_ra_la
20 Nov 2021