विवाह बंधन समाज- मर्यादा से जुड़ा
काल के पथ पर प्रेम के धागों से बुना
लाख चाहे कोई इसमें दरार लाना
छोड़ दो समय पर, पड़ेगी उसे मुंह की खाना
विश्वास की डोर थाम पथ पर आगे बढ़ना
प्रीत और कर्तव्यों को हृदय से निभाना
निभ जाएगा ये भी रिश्ता सुहाना
बस विश्वास से निरंतर बढ़ते जाना।।
आशा झा सखी
-आशा झा Sakhi