हिंदुओं का विशेष पर्व देव उठान विषेश परिचर्चा समय सारणी एवं महत्वपूर्ण जानकारी..... कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी...... की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है. इस साल देवउठनी एकादशी 14 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी. आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, पूजा विधि, और शुभ मुहूर्त.
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ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने का शयन काल पूरा करने के बाद जागते हैं. देवउठनी एकादशी के दिन माता तुलसी (Tulsi) के विवाह का आयोजन भी किया जाता है. इस दिन से भगवान विष्णु सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं और इसी दिन से सभी तरह के मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते हैं
हिंदू धर्म (Hindu Dharma) में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं देवउठनी एकादशी डेट, शुभ मुहूर्त, पूजा- विधि और सामग्री की पूरी लिस्ट➖➖➖➖➖➖➖
देव उठानी एकादशी शुभ मुहूर्त
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एकादशी तिथि का प्रारम्भ: 14 नवम्बर, 2021 को सुबह 5 बजकर 48 मिनट से
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एकादशी तिथि का समाप्त: 15 नवम्बर, 2021 को सुबह 6 बजकर 39 मिनट पर
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15 नवम्बर को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय-1 बजकर 10 बजे से 3.19 बजे
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - रात 1.00 बजे तक
➖ प्रस्तुतकर्ता -ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़