पता चले तुम्हे इश्क की तड़प का एहसास हो
आंखो में कुछ आंसू और मेरे लॉट आने की आश हो
वही आश जिसके सहारे मेने कई वक्त गुजारा हे
वही दर्द जिसने मेरी हर नज़्म को निखारा है
वही आंखे जो तुम्हारी याद में इतना रोई हे
वही आवाज जिसने तुम्हे पल पल पुकारा है
तुम्हे भी रातो को छुप छुप कर रोना होगा
तुम्हे भी भीगे हुए तकिए पर सोना होगा तुम्हे भी करनी होगी बाते इश्क की बेफिक्री से होजाएगा जो कुछ भी होना होगा
कुछ इस तरह भी तुम्हारा जीना बेहाल होगा
तुम्हारे भी जाहिर में एक सवाल होगा
के मेरे बिना वो न जाने केसे रहता होगा
क्या उसके भी आंखो से दरिया बहेता होगा
जब कोई पूछता होगा के जब हम साथ नही
ना जाने वो पागल सबसे क्या कहेता होगा
खेर
इस तड़प का भी तुम्हे जल्द ही एहसास होगा
जब कोई मेरे बहुत करीब बहुत पास होगा
आंखो के उन आंसू वो को तब छुपाओगी केसे
लोग हसेंगे तुम पर तुम दिखाओगी भी केसे
और मेरी नज्में तो सारी बाते कहे ही चुकी है
कोई पूछेगा कुछ तो बताओगी भी केसे
क्या बताओगी तुम्हे कोई पहेचानेगा तब ना
लाख सच बोलोगी कोई मानेगा तब ना
पर मेरी नज़्म सुनने के बाद न जाने लोग क्यू बदल जाते है
देव उस लड़की से ज्यादा कोई बेवफा नहीं होगा