तेरी यादों के सहारे अब जिने लगे है ,
हकिकत से रूबरू होकर ख्वाबों को सुला रहे है ,
अब भी जिंदा है धडकने इस टूटे हूये दिल में ,
ऊन टुकडों को समेट कर पत्थर स्वरूप बना रहे है ,
नही है शिकायत कोई जिंदगी से खुद के घाँव पर खुद ही मरहम लगा रहे है...!
-मनमंजिरी