हमारी भावनाओं के साथ भिन्न भिन्न रंगों का संबंध है: *क्रोध का लाल के साथ, ईर्ष्या हरे के साथ, जीवंतता और प्रसन्नता का पीले के साथ, प्रेम का गुलाबी के साथ, शांति का श्वेत के साथ, त्याग का भगवे के साथ और ज्ञान का बैंगनी के साथ*। हर व्यक्ति नित्य बदलते रंगों का फव्वारा है। हमारी इच्छाएं अग्नि की भांति हमें जलाती हैं। पर *यदि हमारा जीवन होली की तरह है जहां हर रंग स्पष्ट दिखे, तब वे जीवन की मोहकता बढ़ाते हैं। विभिन्नता में सामंजस्य जीवन को प्रफुल्लित, आनंदमय और रंगीन बनाता है*। "सुप्रभात जी"
।।जय सियाराम जी।।