जींदगी एक कहानी है
डेली शॉप सी
जिसकी हर कहानी के दो पेहलु होते है
हमें अक्सर एक किरदार कि और से कहानी पता होती है
वो हि नायक होता है उसे नायिका से हि प्यार होता है..
पर जीवन मे के हर इंसान नायक है अपनी कहानी का
वो जिसे प्यार करें वो हि है नायिका,
पर हर किरदार कि भी अपनी है कहानियाँ...
पर जब मेरी बयां करी कहानी तुम्हारी कहानी से मेल नहीं खाती...
इसका मतलब ये तो नहीं के मे गलत हूँ.. मेरी बातें गलत है
तुम मेरी नज़र कहानी नहीं देखते
जितनी नज़र उतनी कहानी, जितने किरदार उतने पहलु,
जितनी गलत उतनी सही
मेरी कहानी
-यायावरगी