सभी दोस्तों मित्रों साथियों को ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ का नमस्कार है...... दोस्तों आज पितृपक्ष की समाप्ति है और आज अश्विन अमावस्या है, इस सुबह की शुरुआत आप सभी लोगों को शुभ हो मंगलमय हो, सभी परिवार श्राद्ध पक्ष की अमावस्या में अपने पितृपक्ष को श्रद्धांजलि दें... एवं उनसे अनुग्रह करें की आने वाले समय में वह हमारे घर वैसे ही पधारे जैसे वह पहले आए थे...... ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ का मानना है पितृपक्ष अवश्य ही शांति और परिवार के सहानुभूतिअनुभव को महसूस करेंगे......
अश्विन अमावस्या आज है
6 अक्टूबर, 2021 (बुधवार)
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हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन श्राद्ध पक्ष का समापन होता है और पितृ लोक से आए हुए पितृजन अपने लोक लौट जाते हैं। इस दिन ब्राह्मण भोजन तथा दान आदि से पितृजन तृप्त होते हैं और जाते समय अपने पुत्र, पौत्रों और परिवार को आशीर्वाद देकर जाते हैं। इस अमावस्या पर पितृ पूजा, स्नान आदि करने का विधान है। आज के दिन हमें जिन पूर्वजों की मृत्यु की तारीख याद नहीं होती या फिर उनका श्राद्ध करना भूल जाते हैं तो इस दिन भूले बिसरे सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है।
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अश्विन अमावस्या तिथि
अक्टूबर 5, 2021 को 19:06:35 से अमावस्या आरम्भ
अक्टूबर 6, 2021 को 16:37:19 पर अमावस्या समाप्त
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आश्विन अमावस्या का महत्व
ज्ञात और अज्ञात पितृों के पूजन के लिए आश्विन अमावस्या का बड़ा महत्व है, इसलिए इसे सर्व पितृजनी अमावस्या और महालय विसर्जन भी कहा जाता है। इस अमावस्या का श्राद्धकर्म के साथ-साथ तांत्रिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्व है। आश्विन अमावस्या की समाप्ति पर अगले दिन से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो जाते हैं। माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों के आराधक और तंत्र साधना करने वाले इस अमावस्या की रात्रि को विशिष्ट तांत्रिक साधनाएँ करते हैं।
🔱➖ सच्ची श्रद्धा एवं भाव से अपने पितृपक्ष के अंतिम दिन में अपने पितरों को विदाई दें....
🔱➖ प्रयत्न करें पित्रपक्ष विदाई में कोई कमी या त्रुटि न रह जाए जिससे उन्हें दुख हो.....
🔱➖ पितृपक्ष में अपने पितरों के लिए जो सहानुभूति प्यार आप उनको समर्पित करेंगे, आशा है वह भी आपको शुभ आशीष प्रदान करें.... ब्रह्मदत्त
पितृ तर्पण विधि
पितृ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर बिना साबुन लगाए स्नान करें और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पितरों के तर्पण के निमित्त सात्विक पकवान बनाएं और उनका श्राद्ध करें। शाम के समय सरसों के तेल के चार दीपक जलाएं। इन्हें घर की चौखट पर रख दें। एक दीपक लें। एक लोटे में जल लें। अब अपने पितरों को याद करें और उनसे यह प्रार्थना करें कि पितृपक्ष समाप्त हो गया है इसलिए वह परिवार के सभी सदस्यों को आशीर्वाद देकर अपने लोक में वापस चले जाएं। यह करने के पश्चात् जल से भरा लोटा और दीपक को लेकर पीपल की पूजा करने जाएं। वहां भगवान विष्णु जी का स्मरण कर पेड़ के नीचे दीपक रखें जल चढ़ाते हुए पितरों के आशीर्वाद की कामना करें।
प्रस्तुतकर्ता ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़