याद आता हैं वो बचपन सुहाना वो खेल खेल में दोस्तों से लड़ जाना रंग बिरंगी बॉल लिए डब-डब आंसू बहाना नन्ही सी गुड़ियाँ के लिये रोज आशियाना सजाना रोज-रोज चॉकलेट के लिये जिद्द कर जाना डांट पड़ने पर दादी माँ के आँचल में छिप जाना न जाने कहाँ छुट गये वो प्यार भरे तराने बस यादों में छिप गये मेरे बचपन के अफ़साने.pushpendra Kaushal