शीर्षक: योहिं चलेगा, ये सँसार
कल हम न होंगे, हमारी यादें होगी
तुम्हारे पास, अफसोस कि राते होगी
जुल्मों और सितमों से सजती हुई दुनिया में
दौड़ रहा, इंसांनी मन सब कुछ हासिल करने में
जग मे किस रिश्तें की तस्वीर सदाबहार रही
आंखों में प्यार, पीठ में खँजर सी चुभन रही
सत्य भी, अपने अधूरेपन से अब कांप रहा
झूठ के सुनहरे पन से, अंदर तक घबरा रहा
लगता अस्तित्व भविष्य का, खतरों से जूझ रहा
अभी ही जी ले, अब तो इसी पर एक विश्वास रहा
क्रोध के ज्वालामुखीओं का, हो रहा अब विस्तार
कमल, लगता बिना धैर्य के योहिं चलेगा, ये सँसार
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali