शीर्षक: क्षमा याचना..समत्सवरी के पुण्य पर्व पर
गलत हुआ मुझसे, साफ साफ कह दो
रुकी हुई शिकायते मन से, निकाल दो
"समत्सवरी" के पर्व को, आज मान दो
मेरी गलतियों को भी, क्षमा का दान दो
जीवन में विविध रंग के पलों में, गलती स्वभाविक है
पुण्य- भाव अहसास, क्षमा-याचना भी समाधनिक है
पथ पर चलते मेरी किसी भूल से अगर आप आहत है
माफ कर दीजिएगा, ये मेरे ह्रदय की आपसे चाहत है
क्षमा का जीवन का सार है, जीवन का आधार है
गलतियों स्वभाविक, मन की चंचलता, खुला द्वार है
आप और मै जग में, ये मिलन, कैसे न कैसे साकार है
भूलों से हुए आप आहत, मेरी क्षमा-याचना बारम्बार है
क्षमा-याचना सहित ✍️कमल भंसाली