अल्फाज के सब झूठे वादे है,
गाँव गहरा और परिंदा हस रहा है,
नियति मे लिखा सब ठुकरा रहा है,
ना जाने कोनसे मजबूरिया का हिस्सा ले रहा है,
कह तो रहे थे जाए गे नही आपके दिल की पनाह से,
ये तो कयामत थी खुदा की जो लकीरो मे किसी और को बसा रखा है..
DEAR ZINDAGI 👌👌👌