बातों-बातो में जो कसम खाइ थी।
तुम्हें उस कसम कि कसम है।
पलट आवो ना।
अब्बा से नाराज़ होकर भागी थी घरसे।
कसम मेरे सर की, एक छड़ी ना खाने दूंगा।
लौट आवो ना।
अम्मी कभी काम के बिच में,
गलती से तुम्हें आवाज लगा देती है।
लौट आवो ना।
शादी ना करनी थी, उस जागीरदार से।
बताती मुझको, लौट आवो ना।
बड़ी फरमाबदार बेटी निकली तु।
किसी को उफ तक ना सुनाई।
गले कि रश्शि को साथी बना दिया।
बड़ी खुदगर्ज नीकली तु तो।
अब कहां कहां जाकर पुकारु तुम्हें कि,
अब लौट आवो ना।