"मेरा हाल,मेरा जवाब,किसी का सवाल,.."
मैं कैसी हूँ, मैं क्या कर रही हूँ,... बीते एक साल से भी ज़्यादा समय से एक-एक लम्हा,अपने और अपने परिवार के साथ हुए अन्याय,अत्याचार की वज़ह से भोपाल पुलिस के खिलाफ शिकायतें लिख रही हूँ आज,अभी तक...बाकी सर्दी, गर्मी,बसंत,बरसात,जन्मदिन,पर्व,त्योहार,उत्सव,दिन,दोपहर,शाम,रात...मुझे नहीं कुछ याद.,बस कुछ बुरी तारीखें रह गई हैं याद.... बस इतनी सी इच्छा और कोशिश है कि किसी तरह इन अन्यायी, अत्याचारी राक्षसों को उनके किए की सज़ा मिल सकें....I have lost my least happiness..due to all this...खुशी का एक कतरा तक नहीं है मेरी ज़िंदगी में इन दिनों...
Pranjal,31/08/21,