*कठिन परिस्थितियाँ एक* *वाशिंग मशीन की तरह होती* *हैं, जो हमें ठोकर* *मारती हैं, घुमाती हैं और* *निचोड़ती भी हैं। परंतु जब भी* *हम इनसे बाहर आते* *हैं* *तो हमारा व्यक्तित्व पहले* *की अपेक्षा अधिक* *साफ चमकीला और बेहतर* *होता हैं*।
-SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》