मैं कल दिन में जिस संस्कारी व्यक्ति से मिला था ।
सुनी थी धर्म की नयी व्याख्यायें ।
सीखा था आदर्श जीवन के गुर ।
संयमित जीवन जीने के तरीके ।
लोभ मोह माया से बचने के रास्ते ।
ब्रह्म साक्षात्कार के मार्ग ।
मैं आज उसकी जमानत कराने आया हूँ ।
उस पर आरोप है कि उसने अपनी धर्मपत्नी को मरणासन्न होने तक पीटा है ।
बचाने आए अपने बूढ़े माँ बाप को घसीटा है ।
उसे किसी और ने नहीं पकड़वाया है ।
हवालात में उसके बाप ने ही उसे भिजवाया है ।
उसकी जमानत के लिए वह मेरी बगल में खड़े हैं ।
लगता है जैसे फोटो बन फ्रेम में जड़े हैं ।
मैं सोचता हूँ क्यों हैं यह यहाँ पर ।
क्या प्रेम के कारण ,दया के कारण ,मोह के कारण ,ममता के कारण .....
या कि यह भी सोच रहें हैं ।
भाषण देने और व्यवहृत करने के बीच के विभेद को ।
यदि ठीक से समझाया होता ।
तो यह दिन कभी न आया होता ।