29/07 /2021,
विषय - नारी,
"मैं वो नारी हूं"
मैं वो नारी हूं, जिसका पल्लू
पकड़ कर स्वयं परमेश्वर भी
मेरी गोद में सोने की ख्वाहिश रखते हैं
, मैं वो नारी हूं।
मैं वो नारी हूं, जिसका रूप
स्वयं मा काली,लक्ष्मी, दुर्गा हैं,
जिसकी होती पूजा है,
मैं वो नारी हूं।
मैं वो नारी हूं, जिसने पतिव्रता
धर्म का पालन करते हुए,
पति की परछाई बनकर
जीवन वन बिताया है, मैं वो नारी हूं।
मैं वो नारी हूं, जिसके त्याग और
तपस्या की कसमें खाई जाती हैं,
जो बिना पति जिनका महल भी विराना था,
मेरी व्यथा का न किसीने जिक्र भी करना जरूरी नहीं माना, मैं वो लक्ष्मण की उर्मिला हूं।
मैं वो नारी हूं, जिसने पतिव्रता धर्म निभाते हुए, यमराज को भी हराया था, मैं वो सत्यवान की सावित्री हूं।
मैं वो नारी हूं, जिसने कुरूक्षेत्र
मैदान में दुर्योधन केअहंकार को
ललकारा था, अपने स्वाभिमान के केशों को दुर्योधन के लहू से सिंचा था, वो याज्ञसेनी द्रौपदी हू।
आज़ भी मैं वहीं सीता, उर्मिला,
मंदोदरी, द्रौपदी, दमयंती हूं,
मैं ही अहिल्याबाई होलकर हूं,
जीवन के पग-पग पर मैने दी है
अग्नि परीक्षा, मैं हर बार संसार के लिए जी हूं,
संसार के लिए ही मरी हूं, और संसार के लिए ही
अवतरी हूं, मैं आद्य शक्ति जगदंबा हूं। स्वरचित -डॉ दमयंती भट्ट।✍️...© drdhbhatt...