" जवाब हूं "
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लोग कहते है कि मैं नाकामियाब हूं ;
फिर भी उम्मीदों से भरा सैलाब हूं ।
हकीकत है जो तुम पा रहे हो मुज में ;
मै तो हकीकत में जीनेवाला ख्वाब हूं ।
तूने गिराना चाहा मुझे नीचे दिखाना चाहा ;
पर मैं तो ना नीचे मै तो आफताब हूं ।
आओ बैठो शुकून पायेगा मुझे भी मिलेगा ;
मै जितना अच्छा उतना भी ना खराब हूं ।
तेरी फितरत है तो मेरा भी यही स्वभाव ;
तू करे सवाल तो मैं " Bन्दास " जवाब हूं ।
✍️ " Bन्दास "
राकेश वी सोलंकी ।