1 किलोल
साँझ-सबेरे वृक्ष पर, पंछी करें किलोल।
परामर्श यह कर रहे, जीवन है अनमोल।।
2 किलकार
सरकस में जोकर दिखा, गूँज उठी किलकार।
गई उदासी छोड़कर, हँसी भरी तकरार।।
3 वाचाल
नेता जी वाचाल हैं, जनता रहती मूक।
इसी विरोधाभास से, हो जाती है चूक।।
4 नदिया
नदिया प्यासी है अभी, सागर रहे पुकार।
नदिया-सागर का मिलन, रहा अधूरा प्यार।।
5 बौछार
मेघों ने बौछार कर, दिया धरा को सींच।
दूब हरित हो खिल उठी, चित्र रहे हैं खींच।।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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