let EGO go and KINDNESS come
ज़हन में था वो उतर गया
भटक रहा था वो ठहर गया
ढूँढ रहे थे उसे हम,
अब बाहें फैलाए वो सिमट गया।
कांटा था जो चुभा रहा था
मुझ में रह कर,
मुझे ही झुका रहा था।
देखे थे उसके नख़रे हज़ार
तेरे आने ने उसे डरा दिया
छुपा हुआ अंजान है तू,
दिखा दिया कितना महान है तू
पर अब जब तू आ गया,
पाठ ये हमको सिखा गया।
तू बड़ा है, तू महान
हम है तेरे शिष्य नादान
खता हुई थी सज़ा मिली है
अब तेरे आने से देख ज़रा,
वो कहाँ गया
तू मिला है जब से न जाने,
उसे कहाँ भगा दिया।
Sakshi ✍️✍️✍️✍️