कब किसे , किसका मजहब खुदा तक पहुंचा पाया है।
चाहे राम हो या हो रहीम इन सब उसकी माया है।
कुछ खो के भी मशहूर हो गए कुछ गुम हो गए अंधेरे में
जिसने छोड़ दी दुनियां प्रेम में फिर कहाँ लौट के आया है।
कुछ राजा से रंक हुए कुछ हुए फकीर मुहब्बत में।
कुछ ने मन ही मन रोया कुछ ने ज़ार ज़ार अश्क़ बहाया है।